मकर संक्रांति हमारे बिहार झारखंड का पसंदीदा पर्व है, यह हमारे यहां 1 महीने का त्योहार होता है, मकर संक्रांति जिसको कहीं खिचड़ी, कहीं लोहड़ी, कहीं पोंगल कहते हैं हमारे यहां इसे दही चुरा कहते। ठंड में जब खाना बनाने का मन नहीं होता, घर का नया अपना धान का चुरा होता... बस जनवरी पुरा लगभग सरस्वती पूजा तक हमारे यहां दही चुरा और गुड़ ही चलता, इसमें सब्जी का भी कोई जरूरत नहीं.. फिर तिलकुट, तिल के लड्डू, चावल के लड्डू आदि होते हैं।
मकर संक्रांति सूर्य जब धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता तब मनाया जाता है, सूर्य की राशि में प्रवेश करने की कोई तय समय नहीं होती यह कभी सुबह में, तो कभी दोपहर में तो कभी शाम में प्रवेश करता है। इसलिए कभी कभी 14 या 15 जनवरी हो जाता है। एक साल 1832 में कहा जाता है कि 13 जनवरी को मकर संक्रांति हुआ था, 1905 से 14 जनवरी हो रहा जबकि पिछले 6-7 सालों से 15 जनवरी हो रहा। अब भविष्यवाणी कर रहे हैं कुछ ज्योतिषी 2043-45 के बाद 15-16 जनवरी को मकर संक्रांति होगा। ये सब सूर्य के चाल पर निर्भर करता।
मकर संक्रांति 2026 कब है 14 या 15 जनवरी जानें...
मकर संक्रांति 2026 को 14 जनवरी को है। सुर्य उत्तरायण होंगे। ऐसे तो सूर्य मकर राशि में दोपहर 03.06 में में प्रवेश करेगा लेकिन पुण्य काल 08.42 सुबह से ही शुरू हो रहा इसलिए मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही माना जाएगा। इस साल मकर संक्रांति के दिन एकादशी व्रत भी है, खिचड़ी तो इस दिन छूना मना होता क्योंकि एकादशी व्रत में चावल को छूना मना है, इसलिए दान आप तिल कर सकते हैं।
मकर संक्रांति का महत्व...
मकर संक्रांति के बाद सूर्य उत्तरायण होते हैं। इसमें मरने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, कहा जाता है भीष्म पितामह महाभारत युद्ध के बाद 58 दिन तक तीरों की मृत शैय्या पर लेटे रहे इस उत्तरायण के इंतजार में, सुर्य उत्तरायण हुए तब शरीर का त्याग किए कि उनको मोक्ष मिले। कहा जाता है सूर्य उत्तरायण के बाद ही देवता जागृत हो पृथ्वी पर आते, इस दिन को देवताओं का दिन भी कहा जाता है।
मकर संक्रांति पर सूर्य की पूजा की जाती है। मकर संक्रांति के बाद ही शुभ कार्य शुरू किया जाता है। इस दिन गंगा स्नान, तिल दान या कोई भी नदी स्नान का विशेष महत्व होता है। अभी प्रयागराज में माघ मेला का महत्व है इसमें लोग मास करते हैं, वहीं कुटिया बना रहते रोज संगम स्नान कर पुण्य के भागी बनते।
मकर संक्रांति पर गंगा सागर....
मकर संक्रांति पर गंगा सागर तीर्थ स्थान का बहुत महत्व है, कहते थे पहले के लोग सब तीर्थ बार बार गंगासागर एक बार। क्योंकि गंगासागर स्नान बहुत कठिन माना जाता था, अभी भी वहां तक जाने में बहुत दिक्कत है। गंगा सागर पश्चिम बंगाल में पड़ता है इस दिन दुनिया का सबसे बड़ा मेला लगता है, यहां स्नान करने से मोक्ष प्राप्त होता है कहते हैं, राजा सगर थे उनके 60,000 पुत्रों को यहां मोक्ष प्राप्त हुआ था। यहां कपिल मुनि के आश्रम में, मुख्य भीड़ कपिल मुनि का आश्रम ही होता, कहते हैं पुरे साल में एक बार मकर संक्रांति पर ही कपिल मुनि का आश्रम दिखता।
एक बार गंगासागर स्नान करने से 10,000 अश्वमेध यज्ञ और 1000 गाय दान करने जितना पुण्य मिलता है। गंगा सागर में तीर, चावल, तेल, गाय दान करना चाहिए।
इस दिन ऊनी वस्त्र, कंबल, तिल से बनी कोई सामग्री, खिचड़ी, घी, दही, चुरा, गुड़ के लड्डू आदि दान करना चाहिए। आप मकर संक्रांति के दिन तिल को अवश्य तापें, मतलब आग में तिल फेंक उससे हाथ सेंके।
बहुत जगहों पर मकर संक्रांति के दिन पतंग महोत्सव होता है, आप भी पतंग महोत्सव मनाए लेकिन ध्यान रहे किसी पंछी को नुक्सान नहीं पहुंचे। धागा में बारीक सीसा पीस कर दे देते हैं कुछ लोग जो ग़लत है इससे किसी को भी कट सकता, त्योहार को त्योहार के जैसे मनाएं युद्ध जैसे नहीं।
मकर संक्रांति की शुभकामनाएं....
मकर संक्रांति पर अपने दोस्तों रिश्तेदारों को तिल, दही के साथ साथ शुभकामनाएं भी अवश्य भेजें...
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