सरस्वती पूजा, विद्या, कला और संगीत की देवी हैं। इस दिन बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। यह माघ मास की पंचमी तिथि को विद्यार्थी सब मां सरस्वती की पूजा करते हैं। कहा जाता है इसी दिन ब्रह्मा जी के मुख सरस्वती जी उत्पन्न हुई थी, यह दिन बहुत शुभ माना जाता इस दिन शुभ मुहूर्त का कोई बंधन नहीं होता, ये दिन ही साल का सबसे शुभ दिन है, इस दिन विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि सब कार्य कर सकते हैं।
बसंत पंचमी सरस्वती पूजा के साथ साथ हमारे महादेव और पार्वती के रिश्ते शुरू होने का भी दिन माना जाता है। देवघर बाबा मंदिर में इस दिन मिथिलावासी महादेव का शनुन तिलक का दिन मानते और इस दिन बाबा को कबीर और घी अर्पित करते। इसी दिन से होली हमारे यहां शुरू हो जाता। पौराणिक कथा के अनुसार जब महादेव गहन समाधि में लीन थे, तब माता पार्वती ने कामदेव को उनकी तंद्रा भंग करने को बोले, महादेव की समाधि टुटने से इतना गुस्सा हुए अपना तीसरा नेत्र खोल लिया और कामदेव भस्म हो गये।
तब उनकी पत्नी रति ने वर्षों तपस्या कर भगवान शिव को मनाया और अपने पति को फिर पाई। इसलिए इस दिन को महादेव को वैराग्य जीवन से भौतिक जीवन में आने का दिन भी मानते। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का भी विधान है, पीला वस्त्र, पीला फूल आदि चढ़ाया जाता है।
सरस्वती पूजा 2026 कब है....
सरस्वती पूजा विधि -
माघ सप्तमी कब है -
भारत में सरस्वती मंदिर कहां स्थित है...
मां सरस्वती के प्रमुख मंदिर
* मैहर का शारदा मंदिर - मध्य प्रदेश स्थित मैहर में मां सरस्वती का विख्यात मंदिर है जिसे शारदा मंदिर कहा जाता है। मैहर सीमेंट नाम आपने सुना होगा वहीं का हैं, यह मंदिर एक त्रिकुटा पर्वत पर स्थित है जो 600 फुट ऊंचा है। 1063 सीढ़ी है जब हम गये थे तो सीढ़ी ही एक उपाय था लेकिन अब रोप वे और गाड़ी भी जाने लगी है। यहां #बसंतपंचमी के अवसर पर बहुत भीड़ लगता है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि आल्हा और ऊदल आज भी यहां पूजा करने रोज आया करते हैं।
* पुष्कर में सरस्वती मंदिर - राजस्थान के पुष्कर में भारत का एकमात्र ब्रह्मा जी का मंदिर है वहीं मां सरस्वती का भी मंदिर है। कहा जाता है ब्रह्मा जी की पत्नी ने उनको शाप दे दिया था इसलिए यहां के अलावा इनका मंदिर कहीं नहीं है। अब शाप क्यों दिया ये जानना है तो अगले ब्लॉग में कहेंगे फिलहाल अभी मां सरस्वती का मंदिर के बारे में जानें। यहां मां सरस्वती नदी के रूप में उवर्रकता और शुद्धता के लिए जाने जाते हैं।
* श्री ज्ञान सरस्वती मंदिर - यह मंदिर आंध्र प्रदेश के अदिलाबाद में है, यहां बसंत पंचमी पर विशेष भीड़ रहता है, यहां कहा जाता है इस जब महाभारत का युद्ध खत्म हुआ तो वेद व्यास मां सरस्वती की तपस्या किए थे, मां सरस्वती प्रसन्न होकर उनको दर्शन दिए और उनके आदेश अनुसार तीन मुट्ठी रेत से तीन मुर्ति बनाएं जो मां सरस्वती, मां काली और मां लक्ष्मी के रूप में आज भी विराजमान हैं।
* केरल की मुकाम्बिका मंदिर - यह मंदिर विद्या आरंभ उत्सो के लिए फेमस है, यहां बसंत पंचमी पर 10 दिन का मेला भी लगता है। मां सरस्वती का यह मंदिर पुर्व दिशा की ओर मुख करके है। यह केरल के एर्नाकुलम जिले में स्थित है।
* शादरम्बा मंदिर श्रृंगेरी कर्नाटक - आदिगुरु शंकराचार्य जी ने 4 मठ स्थापित किए जिसमें पहला मठ श्रृंगेरी मठ है। जिसे शारदा मठ के नाम से भी जाना जाता है यहां चंदन की लकड़ी की प्रतिमा स्थापित था फिर 14 वी शताब्दी मे सोने की मुर्ति स्थापित किया गया। यहां के बारे में कहा जाता है कि भगवान शिव ने स्फटिक का शिवलिंग आदिगुरु शंकराचार्य जी को दिया था जो यहां स्थापित है। बसंत पंचमी ओ माघ सप्तमी को यहां भीड़ रहता है।
* वाग्देवी नीलसरस्वती मंदिर उज्जैन - यह उज्जैन मध्यप्रदेश में स्थित है, यहां बसंत पंचमी पर माता का स्याही से अभीषेक होता है। यहां कमल का फूल और अष्टर का फूल चढ़ाया जाता है।
विद्यार्थी जीवन में हम लोग हर साल मुर्ति बैठाते थे, अब तो कुछ लोग इसे अपने इंजाय के लिए करते। अब विद्यार्थी सरस्वती पूजा कम ही करते बाकी सब करते... फुहड़ गाने बजाना, जबरदस्ती चंदा इकट्ठा करना, रात भर नाच गाना आदि होता है।

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