द्वादश ज्योतिर्लिंग में पहला सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में,

       सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर अभी बहुत चर्चा में रहा है, 1000 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में भव्य आयोजन किया गया था। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर बहुत आक्रमण हुए, वहां के मंदिर को गजनी मुहम्मद ने 20 बार लूटा, पुरा मंदिर ध्वस्त कर दिया , 1026 ईस्वी में गजनी ने हमला किया, फिर मुगल भी लुटे। 1297 ईस्वी में राजा भोज ने मंदिर का पुनर्निर्माण कराया लेकिन फिर आक्रमणकारी हमला करते रहे। अभी जो मंदिर वहां खड़ा है उसे 1951 ईस्वी में सरदार वल्लभभाई पटेल ने बनवाया।

    सोमनाथ मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र में वेरावल में है। यह गुजरात से 400 किलोमीटर दूर है। पुराणों में प्रभास पाटन का उल्लेख है ये वही जगह है। 

    सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है यह पवित्र प्रभासक्षेत्र यानी गुजरात में स्थित है।इस ज्योतिर्लिंग के बारे में महाभारत, स्कन्द पुराण, श्रीमद्भागवत, ऋग्वेद में भी दिया गया है। भारत के पश्चिमी तट पर अरब सागर के पास हैं। यहां दर्शन मात्र से जन्म जन्मांतर के पाप खत्म हो जाते हैं ‌। ऐसे गुजरात में घूमने की बहुत जगह हैं जैसे द्वारका जी, सरदार वल्लभभाई पटेल की स्टेच्यू, ऊंट, कच्छ, आदि आप गुजरात का प्लान बनाएं तो कम से कम 15 दिन का रखें। 

    सोमनाथ कैसे पहुंचे - सोमनाथ ट्रेन से जाने के लिए सबसे बगल का स्टेशन वेरावल है । हवाई जहाज से केशोड हवाई अड्डा आ सकते हैं। सड़क भी हर जगह से जुड़ा है। 


      द्वादश ज्योतिर्लिंग में पहला सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में...

   सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कहानी - सोमनाथ, सोम का एक अर्थ चंद्रमा भी है और नाथ मतलब स्वामी, मतलब चंद्रमा भगवान शिव की यहां तपस्या किए थे। पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि प्रजापति दक्ष की 27 बेटी थी, उन सभी बेटियों की शादी वो चंद्रमा से किए, लेकिन चंद्रमा सबसे ज्यादा स्नेह रोहिणी से रखते थे। बाकी सभी बहनों को बुरा लगता था वो सभी दक्ष के पास गई दुखी हो पुरी कहानी बताएं।

     दक्ष चंद्रमा के पास गये उनको समझाएं लेकिन वो रोहिणी को इतना मानते थे कि बाकी को स्नेह नहीं दे पाए। बस दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा को शाप दे दिया और कहा कि तुम क्षय हो जाओगे। बस तुरंत ही चंद्रमा क्षय हो गये। धरती, आकाश,‌ पाताल हर जगह हाहाकार मच गया, पृथ्वी पर त्राहिमाम होने लगा।

    चंद्रमा भी बहुत दुखी हो गये, सभी भगवान, ऋषि के पास गये कोई उपाय बताए। सब गये ब्रह्मा जी के पास बोले कोई उपाय बताएं - ब्रह्मा जी बोले इसका एक ही उपाय है भगवान शिव को मनाएं। भगवान शिव की सालों तक तपस्या किए चंद्रमा तब शिव प्रसन्न हुए और उनको वरदान दिए। दक्ष के शाप को भी ग़लत नहीं कर सकते थे इसलिए रोज एक कला क्षीण होगा और अमावस्या के दिन पुरी तरह क्षीण रहेंगे फिर एक कला रोज बढ़ेगा।

    पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा पुर्ण रूप में रहेंगे। इसलिए 15 दिन चंद्रमा घटते हैं फिर 15 दिन बढ़ते जाते।‌ सभी इस वरदान से खुश हुए, सभी देवता और चंद्रमा ने भगवान से प्रार्थना की आप भी यहीं वास करें, तब से भगवान शिव माता पार्वती संग यहां वास करने लगे। 

   सोमनाथ मंदिर के पास कपिला, हिरण और सरस्वती नदी का संगम है जो आगे अरब सागर में गिरता है। यहां की वास्तूकला और शाम की आरती देखने लायक है। मंदिर में भारतीय परिधान पहन कर ही जाएं, साड़ी, कुर्ती, शर्ट पैंट आदि पहन सकते लेकिन मिनी स्कर्ट या हाफ पैंट टाइप नहीं।

   सोमनाथ मंदिर में सोना बहुत था, लगभग 6 टन तो आक्रामणकारियों ने लूट लिया, अभी भी इसके तहखाने हैं जहां बौद्ध गुफाएं और अवशेष मिले। इसलिए युनेस्को विश्व हेरिटेज बौद्ध विरासत के रूप में लिया गया। 
   
    सोमनाथ मंदिर जाने के लिए सबसे अच्छा मौसम ठंड का है, मतलब अक्टूबर से फरवरी, जिसमें आप समुद्र किनारे अच्छी तरह इंजाय कर सकते हैं। ना तब गर्मी में उमस, पसीना मन खिन्न हो जाता। हां इस समय भीड़ बहुत रहती।

   

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