गुप्त नवरात्रि जो हर जगह नहीं मनाया जाता, ये नवरात्रि विशेष रूप से किसी मंदिर या शक्तिपीठ में मनाया जाता है। किसी खास कार्य को सिद्ध करने के लिए भी ये पुजा किया जाता है। साल में 4 नवरात्रि होती है दो नवरात्रि जो शारदीय और चैत्र इसमें सभी मंदिरों और पंडालों में धूमधाम से मनाया जाता है। दो नवरात्रि एक माघ मास और एक आषाढ़ मास जो कम लोग ही करते हैं।
बहुत ऐसे शक्तिपीठ हैं जहां गुप्त नवरात्रि पर विशेष उपाय कर तंत्र-यंत्र-मंत्र साधना की जाती है। घर पर भी आप विशेष पूजा कर सकते हैं, शारदीय नवरात्र और चैत्र नवरात्र में माता का सात्विक पूजा होता उनके नौ रूप शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा होती है। जबकि गुप्त नवरात्रि में तांत्रिक पूजा होती है माता के 10 महाविद्या की पूजा होती है मां काली, तारा मां, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी देवी, मां छिन्नमस्तिका, त्रिपुर भैरवी माता, धूमावती माता, बगलामुखी देवी, मातंगी माता और कमला देवी की अराधना की जाती है।
गुप्त नवरात्रि में आम जन भी पूजा करते जिसमें बस माता का आसान पूजा कर सकते हैं लेकिन जब कोई विशेष तांत्रिक पूजा करनी हो तो किसी अच्छे गुरू के सानिध्य में रह कर करना चाहिए ना तब इसका उल्टा प्रभाव भी पड़ता है। हम इस पोस्ट में गुप्त नवरात्रि के 10 रूपों की माता का शक्तिपीठ कहां कहां स्थित है उसके बारे में जानेंगे। नवरात्रि में कैसे पुजा करें वो जानेंगे और कब से कब है नवरात्रि उसके बारे में जानेंगे।
19 जनवरी से शुरू हो रही गुप्त नवरात्रि...
गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी सोमवार से शुरू हो रही और 27 जनवरी को समाप्त होगा। गुप्त नवरात्रि के पांचवें दिन सरस्वती पूजा भी है इस दिन विशेष पूजा अर्चना होती है। 19 जनवरी को सुबह 6.43 से 12.36 तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त है। गुप्त नवरात्रि में लाल या काला कपड़ा पहन ही पूजा करना चाहिए। सुबह स्नान ध्यान कर स्वच्छ वस्त्र पहन दुर्गा सप्तशती पाठ या दुर्गा चालीसा पाठ करें। सुबह शाम धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें, फूल चढ़ाएं। कन्या भोजन कराएं, तांत्रिक पूजा करें तो किसी को पता नहीं चलना चाहिए, पुरे गुप्त रूप से पूजा करें।
10 महाविद्या का मंदिर...
10 महाविद्या की पूजा गुवाहाटी कामख्या में होती है और दुधेश्वर नाथ मठ दिल्ली में भी, काली घाट कोलकाता, बिहार के डूमरांव में, बांका बिहार में रायपुरा काली मंदिर, छत्तीसगढ़ में काली मंदिर है वहां पर भी साल में दो बार गुप्त नवरात्रि की विशेष पूजा अर्चना होती है।
मां छिन्नमस्तिका मंदिर जो झारखंड के रामगढ़ जिले में रजरप्पा में स्थित है, जो 51 शक्तिपीठ में से एक है, यहां माता की बिना सर वाली मुर्ति है। यह मां पार्वती का एक उग्र रूप है जब मां की दो सखी डाकिनी और शाकिनी की भूख शांत करने माता ने अपना सर काट लिया था। इस मंदिर में भी तंत्र साधना होती है।
दतिया मध्य प्रदेश में पितांबरा पीठ हैं जो मां बगलामुखी और धूमावती की पूजा की जाती है। यहां भी तंत्र साधना होती है।
त्रिपुर सुंदरी माता जो अगरतला के उदयपुर में स्थित है और राजस्थान के बांसवाड़ा जिला भी स्थित है। यहां तंत्र साधना की देवी हैं इनके तीन रूप होते, बाल रूप, लड़की रूप फिर युवा रूप की पूजा होती है। इनकी पूजा बिना गुरु के नहीं करनी चाहिए.. इस बात का विशेष ध्यान रखें कि तंत्र साधना बिना गुरु के नहीं करनी चाहिए।
काशी उत्तर प्रदेश में त्रिपुरा भैरवी, मां तारा पश्चिम बंगाल तारापीठ में, उज्जैन मध्य प्रदेश में मां काली का, त्रिपुर सुंदरी कश्मीर में, उत्तराखंड में भुवनेश्वरी देवी, बिहार के शिवहर में भी 10 महाविद्या का मंदिर है ।
यह जानकारी धार्मिक ग्रंथों और पंरपरागत मान्यता पर आधारित है

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